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आईवीएफ से जुड़े सामान्य मिथक और उनकी सच्चाई (IVF Myths and Facts)
जो लोग फर्टिलिटी ट्रीटमेंट (fertility treatment) कराने के बारे में सोच रहे हैं, उनके लिए आईवीएफ (IVF) से जुड़े मिथकों और उनकी सच्चाई को जानना बेहद ज़रूरी है। हालांकि आईवीएफ ने दुनिया भर में लाखों लोगों को माता-पिता बनने का सुख दिया है, फिर भी कई गलतफहमियां आज भी संभावित मरीजों के मन में भ्रम और बेवजह का डर पैदा करती हैं।
आईवीएफ के पीछे के सच को समझकर लोग अपने इलाज के बारे में सही और सोच-समझकर निर्णय ले सकते हैं। आइए आईवीएफ से जुड़े कुछ सबसे आम मिथकों और उनके पीछे की सच्चाई पर नज़र डालते हैं।
क्या आईवीएफ से हमेशा जुड़वां बच्चे (Multiple Pregnancies) होते हैं?
एक बहुत ही आम मिथक यह है कि आईवीएफ का परिणाम हमेशा जुड़वां या उससे अधिक बच्चों के रूप में ही सामने आता है।
सच्चाई: रिप्रोडक्टिव टेक्नोलॉजी (प्रजनन तकनीक) और भ्रूण चयन (embryo selection) में हुई प्रगति ने कई बच्चों के एक साथ गर्भ में आने की संभावना को काफी हद तक कम कर दिया है। आजकल, विशेष रूप से कम उम्र की महिलाओं के लिए, सिंगल एम्ब्रियो ट्रांसफर (Single Embryo Transfer – SET) को प्राथमिकता दी जाती है। इससे सफल गर्भावस्था की दर बनी रहती है और जुड़वां बच्चों से जुड़े जोखिम भी कम हो जाते हैं।
आईवीएफ के दौरान कितने भ्रूण ट्रांसफर किए जाने हैं, इसका निर्णय मरीज और फर्टिलिटी स्पेशलिस्ट आपस में सलाह-मशविरा करने के बाद ही लेते हैं।
क्या आईवीएफ बच्चों में जन्मजात दोष (Birth Defects) का कारण बनता है?
कई लोगों का मानना है कि आईवीएफ के माध्यम से पैदा होने वाले बच्चों में जन्मजात दोष या विकासात्मक असामान्यताएं (developmental abnormalities) होने की संभावना अधिक होती है।
सच्चाई: वास्तव में, प्राकृतिक रूप से होने वाली गर्भावस्था सहित हर गर्भावस्था में आनुवंशिक विसंगतियों (genetic abnormalities) का एक छोटा सा जोखिम हमेशा होता है। अध्ययनों से पता चला है कि आईवीएफ से पैदा होने वाले बच्चों में जन्मजात दोषों और विकास की दर वैसी ही होती है जैसी कि प्राकृतिक रूप से कंसीव हुए बच्चों में होती है।
जब तक कि माता-पिता में पहले से कोई अनुवांशिक बीमारी न हो, आईवीएफ खुद किसी भी शारीरिक खराबी के जोखिम को नहीं बढ़ाता है। वैज्ञानिक शोध लगातार आईवीएफ इलाज की सुरक्षा और प्रभावशीलता का समर्थन करते हैं।
क्या आईवीएफ से कैंसर का खतरा बढ़ता है?
एक और बड़ी गलतफहमी यह है कि आईवीएफ ट्रीटमेंट से कैंसर, विशेष रूप से ब्रेस्ट कैंसर (स्तन कैंसर) का खतरा बढ़ जाता है।
सच्चाई: मौजूदा रिसर्च में आईवीएफ इलाज और ब्रेस्ट कैंसर के बढ़ते खतरे के बीच कोई सीधा संबंध नहीं पाया गया है। यह समझना बेहद महत्वपूर्ण है कि आईवीएफ की दवाएं और हार्मोन रिप्लेसमेंट थेरेपी (HRT) अपने उद्देश्य, खुराक और अवधि के मामले में एक-दूसरे से पूरी तरह अलग हैं।
अब तक किए गए अधिकांश अध्ययनों में ऐसा कोई सबूत नहीं मिला है जो यह सुझाव दे कि आईवीएफ उपचार ब्रेस्ट कैंसर के जोखिम को महत्वपूर्ण रूप से बढ़ाता है।
क्या आईवीएफ के लिए कोई उम्र सीमा (Age Limit) निर्धारित है?
कुछ लोग यह मान लेते हैं कि आईवीएफ किसी भी उम्र में सफलतापूर्वक किया जा सकता है।
सच्चाई: हकीकत यह है कि हर देश फर्टिलिटी ट्रीटमेंट के लिए विशिष्ट नियमों और आयु दिशानिर्देशों का पालन करता है। भारत में, असिस्टेड रिप्रोडक्टिव टेक्नोलॉजी (ART) अधिनियम 2021 के तहत, विवाहित जोड़े आईवीएफ के लिए तभी पात्र होते हैं जब महिला की उम्र 21 से 50 वर्ष के बीच और पुरुष (पति) की उम्र 21 से 55 वर्ष के बीच हो।
इसके अलावा, एआरटी (ART) प्रक्रियाएं सिंगल महिलाओं के लिए भी उपलब्ध हैं। हालांकि कोई व्यक्ति कितने भी आईवीएफ चक्र (IVF cycles) से गुजर सकता है, इसकी कोई तय सीमा नहीं है, लेकिन आपकी व्यक्तिगत सेहत और हार्मोनल फैक्टर्स के आधार पर फर्टिलिटी विशेषज्ञ के साथ ही ट्रीटमेंट प्लान पर चर्चा की जानी चाहिए।
सोच-समझकर सही निर्णय लें
आईवीएफ को लेकर फैली गलतफहमियां अनचाही चिंता पैदा कर सकती हैं और लोगों को उपलब्ध सही इलाज का लाभ उठाने से रोक सकती हैं। सही तथ्यों को समझने से मरीजों को अपनी फर्टिलिटी यात्रा के बारे में सही और सुरक्षित निर्णय लेने की ताकत मिलती है।
यदि आपके मन में आईवीएफ उपचार को लेकर कोई भी शंका या सवाल है, तो हमेशा एक योग्य फर्टिलिटी विशेषज्ञ (fertility specialist) से परामर्श करें। वे आपको आपकी व्यक्तिगत परिस्थितियों के आधार पर सटीक जानकारी और सही मार्गदर्शन दे सकते हैं।